आफ्रिकन लोगों का विश्व में योगदान
देवनागरी,अरबी,कूर्द,इंग्लिश और सभी यूरोपी देशों की लिपियों का मूल प्राचीन इजिप्त में हैं। बीजगणित और समय की गणना के मूलभूत सिंद्धात भी इजिप्त की सभ्यता में विकसित हुए हैं। पिरॅमिड सबसे प्राचीन धार्मिक वास्तु हैं। मंदिर,मस्जिद,बौद्ध विहार और चर्च की संकल्पना इजिप्त के पिरॅमिड पर आधारित हैं। वेद समय में भारतियों के पास लिपि का ज्ञान नहीं था।
भारतीय लोग वेद और पुराण पठन करके संरक्षित करते थे। सिंधु संस्कृति में चिन्ह लिपि थी लेकिन वो कौनसी लिपि थी यह अभी तक कोई पढ़ नहीं सका हैं।
भेड़-बकरियां यह पशू मूल भारत का नहीं हैं। भेड़-बकरियों को इजिप्त और प्राचीन अनातोलिया (आधुनिक तुर्की) की "हट्टी" सभ्यता में बहुत महत्त्व था। जब इजिप्त और सिरिया से मेषपाल लोग भारत में आये तब वो अपने साथ लिपि और राशियों का ज्ञान लेके आये थे। संस्कृत भाषा तो मूल भारत की ही हैं लेकिन संस्कृत भाषा में सर्वप्रथम विस्तृत शिलालेख "शक" वंश के महाक्षत्रप रुद्रदामन ने लिखा था। शक लोक भारत में सिरिया से आये थे।
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